Thursday, 30 August 2012

“नारी”


मैं प्रस्तुत कविता समस्त नारी जाति को सादर  समर्पित करता हूँ.  अपनी अर्द्धांगिनी को जिनकी कार्य क्षमता, प्रेम, वात्सल्य,  जीवन के प्रति सकारात्मकता एवं  साहस का जिसका मैं सदैव कायल रहा हूँ को इसकी  प्रेरणा मानता हूँ.

            
नारी तुम शक्ति हो, श्रद्धा भी,
लक्ष्मी, सरस्वती हो दुर्गा भी.
भगिनी हो, माँ हो, स्वयं प्रकृति हो,
आनंद हो, जीवन निर्वृति हो .
तेरे शोणित से सिंचित होकर
मानव जीवन पाता है,
ख्वाब जो तुम बुनती हो नारी
रूप वही नर पाता है.
तुम सुभग   हो,  सश्रीक  हो,
भीर नहीं,  निर्भीक हो.
निष्ण हो, निष्पंक हो,
शिव शेखर का मयंक हो.
तू जन्म ही नहीं देती  
जीवन भी देती हो।   
अपने  आंचल की छांव में मानो
अमृत भर देती हो ।  
तू मूरत ममता की,
पराकाष्ठा क्षमता की। 
सहिष्णुता की हिमालय,
श्ल्याघ्य तेरा वात्सल्य.
ह्रदय गह्वर में
करुणा का सागर समेटे,
जीवन पर्यंत चलती हो.
नित्य अहर्निश कार्य करती,
फिर भी  कभी ना थकती हो .
शरदिंदु सी  भावन,
पावन तेरा मन.
हे नारी ! तुम स्तुत्य  हो,
शत शत तुम्हे नमन. 
^^^^^^^^^^^^^
     नीरज कुमार नीर


सश्रीक : सुंदर , सौभाग्यशाली

Sunday, 26 August 2012

जीना सीखा दिया

जब से मिले हो तुम,  जीना सीखा दिया ,
रस्ते के पत्थर को, सोना बना दिया .

हरदम, फूलों सी तुम,  महका करती हो,
जीवन को मेरे तुमने, गुलशन बना दिया.

हूरों से भी खूबसूरत, मेरा यार है ……,
दुनियां को जिसके प्यार ने जन्नत बना दिया.

तुमसे पहले जिंदगी अमावस की रात थी ,
तुम  जो  आए,  इसे पूनम बना दिया. 
                 नीरज कुमार

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Wednesday, 15 August 2012

अगर चाहिए शांति



अगर चाहिए शांति तो 
हाथ में तलवार लीजिए
फाड़  दु:शासन की छाती
उसका लहू पीजिए 
दया से दिल जीते जाते है
जग बल से जीता जाता है.
जीतने वालों की जय होती है
जग उसी के गीत गाता है ...
शांति का उपदेश देकर
विश्व गुरु बन सकते हो
लेकिन बोलो क्या
सीमा की रक्षा भी कर सकते हो?
देखो दुष्ट पड़ोसी कैसे ऐठा है
हमारी भूमि को चीन दबाए बैठा है,
अगर सीमा सुरक्षित चाहिए
तो साहस का दम भरिये
अगर चाहिए शांति तो 
हाथ में तलवार लीजिए
घर सुरक्षित नहीं रहता
प्यार के मीठे बोलों से
तन कर खड़े होइए
शोलों का जवाब दीजिए शोलों से..

दीन हीन विषहीन जगत में
सम्मान नहीं पाते  है...
विषदर्प से भरा विश्व में
नाग ही पूजे जाते हैं .

विनय से काम नहीं चले जब
भर ह्रदय में अंगार लीजिए
दनुज तुम्हारी करुणा को
कायरता समझेगा
उठा खड्ग हाथों में उनका संहार कीजिये...

गिरिराज है रोता , गंगा  कराहती
वसुन्धरा रोम रोम से पुकारती
उठो जागो भारत के वीर जवानों
बड़े उम्मीदों से  माँ भारती निहारती..

जिस धरती पे जन्म लिया
उसका कर्ज उतारना होगा
जिस धरती ने जीवन दिया
अपना फ़र्ज़ निबाहना होगा.

इतिहास का यह काल खंड
तुमको याद करेगा
अब अगर नहीं चेते तो
भविष्य बर्बाद करेगा ..
   "नीरज कुमार नीर"
चित्र गूगल से साभार 

Sunday, 12 August 2012

प्यार

हम अपने ही दिल के दुश्मन बन बैठे,
किसी अजनबी से हाय प्यार कर बैठे.
हमने इज़हार किया, वो मुस्कुराते रहे,
उनकी मुस्कराहट को  इकरार समझ बैठे.
उनकी निगाहें  खामोश थी,   लेकिन,
उनकी  खामोशी को ही प्यार समझ बैठे.
जुल्फों से खेलने की नहीं थी ख्वाहिश हमे,
हम तो उनकी बातों के तलबगार बन बैठे
उनकी बेरुखी का कोई  गिला नहीं ‘नीरज’
खंजर भी ना निकला और क़त्ल कर बैठे.
वो भुला दे हमे,  कोई गम नहीं है
हम भुलाने बैठे तो खुद को भुल कर बैठे.
                 नीरज कूमार “नीर”

Thursday, 9 August 2012

कब आओगे बनवारी



श्याम , मनोहर , गिरधारी
कब आओगे बनवारी .

कुञ्ज गलिन में ढूंढा तुमको
ढूंढा  यमुना किनारी..

श्याम , मनोहर , गिरधारी
कब आओगे बनवारी

माधव, केशव, मुरलीधारी,
कब आओगे बनवारी

गोकुल वन में ढूंढा तुमको
ढूंढा द्वारी द्वारी

गोविंद , गोपाल,  प्रिय मुरारी
कब आओगे बनवारी

कदम्ब गाछ पे ढूंढा तुमको
ढूंढा हर नर नारी

राधा रमण , बांके बिहारी
कब आओगे बनवारी

श्याम , मनोहर , गिरधारी
कब आओगे बनवारी

   नीरज कुमार ‘नीर’


गोकुल नगरी आनंद भयो


गोकुल नगरी आनंद भयो
आयो कृष्ण गोपाल
सांवरी सूरत, कारे नयना
मुस्काए नन्द को लाल
हुलसी हुलसी यशुमती
कर रही दुलार  
गोकुल नगरी आनंद भयो
आयो कृष्ण गोपाल
ढम, ढम,ढम, ढम ढोलक बाजे
नाचे सभै  ग्वाल
सखियाँ संग यशोदा नाचे
सोहे  द्वारे बंदनवार
हरखी माता लगावे टीका 
कारे भयो कान्हा के भाल.
गोकुल नगरी आनंद भयो
आयो कृष्ण गोपाल

      .. .....नीरज कुमार ‘नीर’



चित्र गूगल से साभार 

Monday, 6 August 2012

क्षितिज के उस पार


क्षितिज के उस पार प्रिय,
जहाँ तुम ना होगी,
जहाँ चाँद , सूरज ना होगें,
ना खुशियाँ होगी,
ना गम होगा,
ना प्रकाश, ना तम होगा.
ना उजाले के लिए तरसुंगा,
ना अंधियारे से लड़ना होगा.
ना कुछ पाने की ख्वाहिश,
ना खोने का भय होगा.
क्षितिज के उस पार प्रिय,
मैं हूँगा और होंगी तुम्हारी यादें,
तुम्हारी खूबसूरत यादें 
………….   नीरज कुमार नीर

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