Sunday, 24 February 2013

बम की जात


अभी हैदराबाद में बम विस्फोट हुए, कई निरपराध मारे गए , जिसमे हिंदू थे , मुसलमान भी. बम ने फटने के बाद कोई भेद नहीं किया मारने में हिंदू और मुस्लमान में, उसे इस बात से कोई मतलब नहीं था कि बम चलाने वाले का मजहब क्या है. इसी बात से प्रेरित है मेरी प्रस्तुत कविता :

बम ना जाने जात कुजात ,
बम जाने ना मजहब  की बात.
बम ना जाने धर्म इमान,
बम देखे ना हिंदू, मुसलमान.
बम का बस है एक ही काम
बम लेता इंसानो  की जान .

बम ना पढता कलमा , आयत ,
ना उसे बाइबिल , गीता का ज्ञान.
बम का एक ही धर्म जहाँ में
बम लेता इंसानो  की जान.

जब तक बम हाथो में है,
तब तक ही बम का है नाम.
हाथों से जो छूट गया फिर
बम का तो अपना ही काम
बम तो केवल बम है, उसके लिए
क्या हिंदू , क्या मुसलमान .
बम का बस है एक ही काम
बम लेता इंसानों  की जान

आतंकी का मजहब होता है,
बम का मजहब  नहीं होता,
बम जब फटता है तो
नाम किसी का नहीं पूछता.

सुनो आतंकवादियों सुनो:
बम फोड़ना इससे पहले
ऐसा कुछ इजाद कर लाओ
मजहब के नाम पर क़त्ल करे
ऐसा बम बनाकर लाओ.
............ नीरज कुमार ‘नीर’
#neeraj_kumar_neer

35 comments:

  1. बहुँत सुन्दर रचना है ...आभार

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    1. बहुत शुक्रिया.

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  2. बम तो केवल बम है, उसके लिए
    क्या हिंदू , क्या मुसलमान .
    बम का बस है एक ही काम
    बम लेता इंसानों की जान

    आतंकी का मजहब होता है,
    बम का मजहब नहीं होता,
    बम जब फटता है तो
    नाम किसी का नहीं पूछता.
    प्रिय नीरज जी अच्छा चेताया आप ने काश इन मानवता के दुश्मनों को ये बात पता चल जाती लेकिन इनसे धर्म कर्म से क्या मतलब है ये तो बस आतंक .....
    भ्रमर ५

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    1. बहुत बहुत आभार सुरेन्द्र शुक्ल जी.

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  3. नीरज-जी, बहूत ही सुन्दर और सार्थक रचना है...

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  4. बहुत बहुत शुक्रिया अनिमेष जी..

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  5. Bahut khub. Aisa bum bhi banao jo sirf Hindu ya sirf Musalman mare, kewal Insan na mare.

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  6. आप की ये रचना शुकरवार यानी 01/03/2013 को http://www.nayi-purani-halchal.blogspot.com पर लिंक की जा रही है... इस संदर्भ में आप के सुझावों का स्वागत है...
    सूचनार्थ।

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  7. Bahut Bahut abhar Kuldeep Sing ji.

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  8. सच जिस पर बम गिरे वे ही जानता है क्या गुजरती हैं ..काश ये बात दहसतगरद समझ पाते...बहुत बढ़िया

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    1. बहुत आभार, कविता जी.

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  9. बहुत आभार निशा जी.

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  10. आतंकी का मजहब होता है,
    बम का मजहब नहीं होता,
    बम जब फटता है तो
    नाम किसी का नहीं पूछता...

    सच कहा है ... जब बम्ब चलता है तो जो आता है उसे रौंदता है ... आतंकियों को कौन समझाए ये ...

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    1. बहुत शुक्रिया दिगंबर जी.

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  11. BlogVarta.com पहला हिंदी ब्लोग्गेर्स का मंच है जो ब्लॉग एग्रेगेटर के साथ साथ हिंदी कम्युनिटी वेबसाइट भी है! आज ही सदस्य बनें और अपना ब्लॉग जोड़ें!

    धन्यवाद
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  12. बम ना पढता कलमा , आयत ,
    ना उसे बाइबिल , गीता का ज्ञान.
    बम का एक ही धर्म जहाँ में
    बम लेता इंसानो की जान.-------gajab-bahut sarthah baat kahi hai
    bom ka sahi nichod nikala hai----badhai

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    1. बहुत आभार श्रीमान ज्योति खरे जी. कृपया स्नेह बनाये रखियेगा.

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  13. बहुत उम्दा .. बहुत बधाई

    मेरी नई रचना
    ये कैसी मोहब्बत है

    खुशबू

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    1. दिनेश जी बहुत शुक्रिया..

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  14. बढ़िया प्रश्न है ..
    शुभकामनायें आपके लिए !

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    1. बहुत शुक्रिया सतीश सक्सेना जी..

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  15. bahut badhiya rachna hai apki neeraj ji .bahut sateek

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    1. बहुत शुक्रिया रौनक जी. मेरा ब्लॉग ज्वाइन करने के लिए बहुत आभार.

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  16. सुन्दर अभिव्यक्ति.

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    Replies
    1. बहुत शुक्रिया निहार रंजन जी.

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  17. This comment has been removed by the author.

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  18. आतंकी का मजहब होता है,
    बम का मजहब नहीं होता,
    बम जब फटता है तो
    नाम किसी का नहीं पूछता.

    सुनो आतंकवादियों सुनो:
    बम फोड़ना इससे पहले
    ऐसा कुछ इजाद कर लाओ
    मजहब के नाम पर क़त्ल करे
    ऐसा बम बनाकर लाओ.
    आतंकियों की आंख खोलनेवाली रचना -बहुत सुन्दर
    latest post मोहन कुछ तो बोलो!
    latest postक्षणिकाएँ

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  19. बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति ...

    आप भी पधारें
    ये रिश्ते ...

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  20. बहुत ही सुंदर .... एक एक पंक्तियों ने मन को छू लिया !!!!

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आपकी टिप्पणी मेरे लिए बहुत मूल्यवान है. आपकी टिप्पणी के लिए आपका बहुत आभार.

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