Tuesday, 5 March 2013

बलमुआ झूठ ना बोलो


फागुन आ गया और फागुन की मस्ती के क्या कहने , ऐसे ही फागुन की मस्ती में एक पत्नी और एक पति के बीच के नोकझोक की दास्ताँ है मेरी प्रस्तुत कविता. पढ़िए और आनंद लीजिए:



बलमुआ झूठ ना बोलो
कि आया फाल्गुन मास सुहाना.
किससे तुमने नैन लड़ाई,
किससे दिल लगाया है.
कौन है बैरी सौतन मेरी
कहाँ से उसको लाया है.
बलमुआ झूठ ना बोलो
कि आया फाल्गुन मास सुहाना.
उड़ा उड़ा सा चेहरा तेरा
माथे पे पसीना
तू बड़ा हरजाई बालम
ना  कहोगे तो
कहूँगी ना.
बलमुआ झूठ ना बोलो
कि आया फाल्गुन मास सुहाना.
सास देवे गारी
ननद मारे ताना.
जेठ आँख दिखावे मोहे
देवरा बड़ा सयाना.
बलमुआ झूठ ना बोलो
कि आया फाल्गुन मास सुहाना..

.......... नीरज कुमार ‘नीर’

11 comments:

  1. होली से पहले होली की याद दिला दी .....अब की होली तै बलमवा की खैर नाही
    Please visit my blog....
    सूरज का गोला .. .

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया..

      Delete
  2. kya baat hai neeraj bahut majedar rachna saas deve gaari nanad maare taana ..jeth mohe aankh dikhawe ..devar bada sayana..maja aa gaya padh ke :-)
    मेरा लिखा एवं गाया हुआ पहला भजन ..आपकी प्रतिक्रिया चाहती हूँ ब्लॉग पर आपका स्वागत है

    Os ki boond: गिरधर से पयोधर...


    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत शुक्रिया.

      Delete
  3. बढ़िया है आदरणीय -
    बधाइयां-

    ReplyDelete
  4. होली पर मजेदार रचना,,,बधाई नीरज जी,,,

    Recent post: रंग,

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत शुक्रिया

      Delete
  5. होली में बलमुआ पे इल्जाम .........रंग फीका न हो जाय

    ReplyDelete
  6. बहुत खूबसूरत ब्लॉग मिल गया, ढूँढने निकले थे। अब तो आते जाते रहेंगे।

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणी मेरे लिए बहुत मूल्यवान है. आपकी टिप्पणी के लिए आपका बहुत आभार.

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...