Thursday, 18 December 2014

कौआ बोला कांव कांव : एक बाल कविता


कौआ बोला कांव कांव
बिल्ली बोली म्याऊँ म्याऊँ
मे मे करके बकरी भागी
शेर बोला किसको खाऊँ ॥

भों भों करता कुत्ता आया
आसमान में चील चिल्लाया
चीं चीं करता चूहा बोला
कहाँ जाऊँ मैं कहाँ जाऊँ

सूढ़ उठा हाथी चिंघाड़ा
हिनहिना कर दौड़ा घोड़ा
कछुआ ने खरगोश से बोला
ठहर जरा तो मैं भी आऊँ

मुर्गे ने दी ज़ोर की बांग
ऊँट की लंबी लंबी टांग
बारिश हुई मेढक टर्राया
अब तो पानी मे मैं जाऊँ ॥
……. Neeraj kumar neer
21/10/2014

9 comments:

  1. आपकी लिखी रचना शनिवार 20 दिसंबर 2014 को लिंक की जाएगी........... http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. सुन्दर प्रस्तुति

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  3. सुंदर बाल कवि‍ता...अच्‍छा लगा पढ़कर

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  4. सुन्दर बाल कविता ... हमको इतना मज़ा आया तो बच्चों को तो और भी ज्यादा मज़ा आ जायेगा ...

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  5. सुन्दर बाल रचना ..

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  6. सुन्दर बाल कविता...बहुत अच्छा ।

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