Sunday, 24 January 2016

नाम अपने हुस्न के मेरी जवानी लिख ले

2122/ 2122/ 2122/ 22
शाम लिख ले सुबह लिख ले ज़िंदगानी लिख ले
नाम अपने हुस्न के मेरी जवानी लिख ले ।

कब्ल तुहमत   बेवफ़ाई   की लगाने   से सुन
नाम मेरा  है वफा की   तर्जुमानी   लिख ले ।

जो बनाना  चाहता है  खुशनुमा  दुनया को
अपने होंठो पे मसर्रत की कहानी  लिख ले ।

मंहगाई बढ़ रही है  रात औ दिन  साहब
वादे अच्छे  दिन के निकले  लंतरानी  लिख ले  ।

लाल होगी यह जमी गर   आदमी  के   खूँ से
रह न जाए गा अंबर भी   आसमानी  लिख ले ।

रात का सागर अगर है गहरा तो यह तय है
कल किनारों पर न होगी सरगरानी लिख ले ।

रह नहीं सकते यहाँ तुम संग इन्सानो के
संग उसके घर पे रहते आग पानी लिख ले  ॥

और अंत में :
कर गया जो फेल दसवीं की परीक्षा पप्पू
अब करेगा गाँव की अपने प्रधानी लिख ले  ।
......... नीरज कुमार नीर
#Neeraj_Kumar_Neer

Friday, 15 January 2016

नया साल

एक साल खत्म हुआ
नया साल आ रहा है
समय कितनी जल्दी बीत जाता है
देखते देखते बीत गए
कितने बरस
गहरे उच्छ्वास के साथ मन ने कहा
समय सुन रहा था मुझे
उसने मुस्कुरा कर कहा
बीत तो तुम रहे हो मेरे बच्चे
मैं तो वहीं का वहीं हूँ
अनंत काल से
आगे भी वहीं रहूँगा
तुम्हारे पुनः पुनः पुनरागमन के दौरान
तुम्हारे निर्वाण तक
जब मैं हो जाऊँगा
अर्थहीन
तुम्हारे लिए।
नीरज कुमार नीर
#Neeraj_Kumar_Neer
#new_year

Wednesday, 6 January 2016

मैं खुश हूँ कि मैं जो हूँ

मैं एक काफिर हूँ
हां! तुम्हारे लिए मैं एक काफिर हूँ,
यद्यपि कि मैं मानता नहीं किसी को
सिवा एक ईश्वर के
मैने कभी सर नहीं झुकाया
किसी बुत के सामने
मैं नहीं मानता बराबर किसी को
उस ईश्वर के
मैंने कभी झूठ नहीं बोला
हिंसा नहीं की
चौबीसों घंटे ईश्वर की अराधना करता हूँ
मानव तो मानव
करता हूँ जीव मात्र का सम्मान ।
फिर भी मैं काफिर हूँ
हाँ तुम्हारे लिए
फिर भी मैं काफिर हूँ
तुम्हें अधिकार है
मेरा सर कलम करने  की
मेरी संपत्ति  लूट लेने की
और न जाने क्या क्या
क्योंकि मैं काफिर हूँ
मैं जानता हूँ
मैं सत्य की राह पर हूँ
मैं भटक नहीं सकता
पर तुम नहीं मानते
तुम्हें नहीं मानने के लिए कहा गया है
तुम नहीं मानोगे जब तक
मैं तुम्हारी बोली न बोलने लगूँ
तुम नहीं मानोगे जब तक
मैं तुम्हारा रूप न धर लूँ
जो मेरा पुण्य है
जो मेरा धर्म है
वह अर्थहीन है तुम्हारी दृष्टि में
क्योंकि मैं काफिर हूँ
हालांकि मैं खुश हूँ कि मैं जो  हूँ
..............  #नीरज कुमार नीर
#neeraj_kumar_neer
#kafir #काफ़िर #Hindi_poem #qafir 

Tuesday, 5 January 2016

पास उसके दर्द की कोई दवा नहीं है

वो हमसफर तो है पर हमनवा नहीं है
वो धूप छांव है ताजा हवा नहीं है.... ।
वो फूल सा दिखाई देता है मगर ...
पास उसके दर्द की कोई दवा नहीं है ।
.... #neeraj_kumar_neer  
नीरज कुमार नीर 
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...