Tuesday, 17 September 2013

कौन रोता है , यहाँ?




अर्द्ध रजनी है , तमस गहन है,
आलस्य घुला है, नींद सघन है.
प्रजा बेखबर,  सत्ता मदहोश है,
विस्मृति का आलम, हर कोई बेहोश है.
ऐसे में कौन रोता है , यहाँ?

रंगशाला रौशन है, संगीत है, नृत्य है,
फैला चहुँओर ये कैसा अपकृत्य है.
जो चाकर है, वही स्वामी है
जो स्वामी है, वही भृत्य है .
ऐसे में कौन रोता है , यहाँ?

बिसात बिछी सियासी चौसर की
शकुनी के हाथों फिर पासा है .
अंधे, दुर्बल के हाथों सत्ता है
शत्रु ने चंहुओर से फासा है .


पांचाली का रूदन अरण्य है,
(दु) शासन का कृत्य जघन्य है .
शांत पड़े मुरली के स्वर
स्व धर्म का अभिमान शून्य है.
ऐसे में कौन रोता है , यहाँ?

कल की किसी को परवाह नहीं है,
स्वदेश हित की चाह नहीं है
सबकी राहें हैं जुदा जुदा
देश की एक कोई राह नहीं .
ऐसे में कौन रोता है , यहाँ?

#neeraj_kumar_neer 
.............. नीरज कुमार 'नीर'

चित्र गूगल से साभार 

18 comments:

  1. वेदना को बहुत सार्थक अभिव्यक्ति दी है. अति सुन्दर कृति.

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  2. वर्तमान स्थिति का बहुत सुन्दर प्रतितिकरण !
    latest post: क्षमा प्रार्थना (रुबैयाँ छन्द )
    latest post कानून और दंड

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    Replies
    1. "प्रतितिकरण" को "प्रस्तुतीकरण" पढ़ा जाय

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  3. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  4. सामायिक स्थिति की बढ़िया कटाक्ष !!
    बिल्कुल यही हालत हैं... सभी अपने में मस्त हैं कौन फ़िक्र करने वाला है...

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  5. वाह वाह बहुत ही सुंदर सृजन ! बेहतरीन प्रस्तुति,

    RECENT POST : बिखरे स्वर.

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  6. बहुत खूब....बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

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  7. वेदना अब मौन भी होती नहीं..बहुत बढ़िया..

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  8. बेह्तरीन अभिव्यक्ति बहुत खूब ,

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  9. पांचाली का रूदन अरण्य है,
    (दु) शासन का कृत्य जघन्य है .
    शांत पड़े मुरली के स्वर
    स्व धर्म का अभिमान शून्य है.
    ऐसे में कौन रोता है , यहाँ?

    इस भयावह स्थिति में तो प्राकृति भी क्रंदन कर उठेगी ... काश की समय रहते चक्र का संधान हो जाए ...

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  10. देश की एक कोई राह नहीं .
    ऐसे में कौन रोता है , यहाँ?

    .... बढ़िया कटाक्ष !!

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  11. संवेदनाओं का आकाल रोता हैं यहाँ पर

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  12. prya neerj ji,aap ki pida bahut kuchh kahti hai.
    panchali ek hai dusasan anek hai
    kirshna ji kab aaenge ,panchali ki laj bachaenge.

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  13. बेहतरीन अभिवयक्ति.....

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  14. आह!!!
    यहाँ कोई नहीं रोता मेरे तुम्हारे लिए....
    अपने रोने हैं सबके पास....

    बेहतरीन अभिव्यक्ति.....
    बेहद गहन .....
    सस्नेह
    अनु

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  15. आज के यथार्थ का सटीक चित्रण करती बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  16. समसामयिक विषय पर सोचने को मजबूर करती है आपकी रचना !!

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आपकी टिप्पणी मेरे लिए बहुत मूल्यवान है. आपकी टिप्पणी के लिए आपका बहुत आभार.

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