Sunday, 3 April 2016

प्रजातन्त्र के खेल


राजा ने कहा :
जनता को विकास चाहिए
आओ खेलें
विकास-विकास

पर सरकार ! कुछ दिनों के बाद
जनता मांगेगी
विकास का प्रमाण ...

तो फिर खेलेंगे
धर्म–धर्म / मजहब-मजहब
जनता मजहब की भूखी है

पर सरकार! कुछ दिनों के बाद
जनता मांगेगी
मंदिर/मस्जिद.........

तो फिर खेलेंगे
देश-देश
जनता देश-भक्ति की भूखी है

पर सरकार ! कुछ दिनों के बाद
जनता मांगेगी
सीमा पर मरने वाले सैनिकों का हिसाब....

तो फिर खेलेंगे
जाति-जाति
जनता जाति की भूखी है

पर सरकार ! जाति से पेट नहीं भरता
जनता को विकास चाहिए
तो फिर से खेलेंगे
विकास–विकास ......
#नीरज कुमार नीर  / 20,12,2015
#Neeraj_kumar_neer 
#prajatantra #प्रजातन्त्र  #मंदिर #मस्जिद #धर्म #हिन्दी_कविता #hindi_poem #prajatantra #dharm #desh #janta
चित्र गूगल से साभार 

11 comments:

  1. जबरदस्त कटाक्ष किया है नीरज जी।

    भूखों के सामने अक्सर रोटी की बात करते है,
    एक एक वोट कितनी मेहनत के बाद मिलता है.....http://manishpratapmpsy.blogspot.com

    ReplyDelete
  2. मस्त है व्यंग और व्यंग की धार ... गहरा कटाक्ष ...

    ReplyDelete
  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (04-04-2016) को "कंगाल होता जनतंत्र" (चर्चा अंक-2302) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  4. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " सिरियस केस - ब्लॉग बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    ReplyDelete
  5. आपने लिखा...
    कुछ लोगों ने ही पढ़ा...
    हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 05/04/2016 को पांच लिंकों का आनंद के
    अंक 263 पर लिंक की गयी है.... आप भी आयेगा.... प्रस्तुति पर टिप्पणियों का इंतजार रहेगा।

    ReplyDelete
  6. स्वयं के विकास में अपना विकास समझ लेते हैं ...
    बहुत सही ..

    ReplyDelete
  7. नीरज जी आपने अपनी कविताओं को सुन्दर शब्दों में पिरोया है। आपकी कविताओं में कहीं प्या,र तो कहीं ममता, तो कहीं तड़प कहीं उलझन और इसके साथ ही राजनीति पर भी कड़े कटाक्ष बखूबी किये है। जो वास्तव में ही प्रशंसनीय है।
    आपके बेहतरीन लेखन के लिए आपको बधाई। साथ ही आपको सूचित करना चाहेंगे कि आपके ब्लाॅग को हमने Best Hindi Blogs पर लिस्टेड किया है। आप अपना प्रमाण पत्र यहां से प्राप्त करें।
    - Team - www.iBlogger.in

    ReplyDelete
  8. Looking to publish Online Books, in Ebook and paperback version, publish book with best
    Free E-book Publishing Online|Ebook Publishing company in India

    ReplyDelete
  9. अच्छा व्यंग्य

    ReplyDelete
  10. कडवा सच है। बहुत अच्छा लिखा है

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणी मेरे लिए बहुत मूल्यवान है. आपकी टिप्पणी के लिए आपका बहुत आभार.

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...