Sunday, 27 December 2015

मैं परिंदा हूँ मेरा ईमान न पूछो : गजल

मैं परिंदा हूँ ..... ... मिरा ईमान न पूछो
क्या हूँ, हिन्दू या कि मुस्सलमान न पूछो।

चर्च, मंदर, मस्जिदें ....सब एक बराबर
रहता किसमे है मिरा भगवान न पूछो.

मजहबी उन्माद में जो मर गया वो था
एक जिंदा आदमी , पहचान न पूछो ।

पीठ में घोपा हुआ है नफरती खंजर
रोता क्यों है अपना हिंदुस्तान न पूछो ।

आलमे बेचैनियाँ हर सिम्त है फैली
हर गली हरसू क्यों है वीरान न पूछो ।

खूब काटी है फसल अहले सियासत ने
खाद बन, किसने गँवाईं जान न पूछो ।

भाई मारा जाता है जब, भाई के हाथों
होती कितनी ये जमीं हैरान न पूछो ।
...... नीरज कुमार नीर .............
#neeraj_kumar_neer
#gazal  #hindu #hindustan #bhagwan 

8 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 29 दिसम्बर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. मन के किसी कोने में झाकने को मजबूर करते सुन्दर अलफ़ाज़ लिखे हैं कविवर नीर साब आपने !!

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  3. बहुत अच्छा लिखा है.

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  4. बहुत ही बढियां लाजवाब ग़ज़ल

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  5. बहुत सुंदर रचना ।

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  6. बहुत गहरे शेर .... आइना दिखाते हुए ...

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आपकी टिप्पणी मेरे लिए बहुत मूल्यवान है. आपकी टिप्पणी के लिए आपका बहुत आभार.

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