Thursday, 25 January 2018

कुछ तो नया कीजिये अबके नए साल में

"जंगल में पागल हाथी और ढोल" संग्रह से एक कविता :
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कुछ तो नया कीजिये अबके नए साल में

सूर्य वही चाँद वही
धूप  वही छांव वही
वही गली वही डगर
गांव वही, वही शहर
घृणा वही, रार वही
दिलों में दीवार वही
मंदिर और मस्जिद के
जारी हैं तकरार वही
प्रेम होना चाहिए आपस में हर हाल में
कुछ तो नया कीजिये अबके नए साल में

वही गगन वही धरा
आदमी है डरा डरा
हर तरफ आतंक वही
मजहबी पाखंड वही
रीति वही नीति  वही
कायम राजनीति वही
भूख वही लूट वही
लूटने की छूट वही
उलझा हुआ है आदमी पेट के सवाल में
कुछ तो नया कीजिये अबके नए साल में

सोच व  विचार वही
वोट का आधार वही
चाल वही भेड़ वही
कुर्सी का खेल वही
सत्ता का लोभ वही
जनता में क्षोभ वही
रोग व बीमार वही
वैद्य उपचार वही
लोकतंत्र पड़ा है कब से अस्पताल में
कुछ तो नया कीजिये अबके नए साल में….
………… #नीरज  नीर
#neeraj_neer
#new_year
#hindi_poem
#jungle_mein_ pagal_ hathi_ aur_ dhol 

Wednesday, 3 January 2018

आपने "जंगल में पागल हाथी और ढोल' पढ़ा क्या?

"जंगल में पागल हाथी और ढोल' को पढ़कर वरिष्ठ कवि श्री राजेश्वर वशिष्ठ कहते हैं -------- ------- ------ . नीरज नीर बहुत संभावनाशील,चैतन्य कवि हैं जो समाज की नब्ज को भरपूर विवेक और ईमानदारी से अपनी कविताओं में टटोलते हैं। हिंदी कविता के परिदृश्य में यह एक चमकदार नक्षत्र का प्रतीक्षित उदय है। बधाई। ------ ----- --- आपने "जंगल में पागल हाथी और ढोल' पढ़ा क्या ???? अगर नहीं तो अभी मंगाएं यह संकलन मात्र 120/- रु. में उपलब्ध है। डाक ख़र्च फ्री। रज़िस्टर्ड डाक से किताब भेजी जाएगी। मूल्य आप इस नंबर पर पेटीएम कर सकते हैं- 8756219902 या इस खाते में जमा करा सकते हैं- accont details- Rashmi prakashan pvt. ltd. a/c no- 37168333479 state bank of india IFSC Code- SBIN0016730 आपको पुस्तक भेज दी जाएगी। मूल्य जमा कराने के पश्चात जमा कराने का प्रमाण अौर अपना पूरा पोस्टल एड्रेस 08756219902 पर वाट्सअप कर दें --- अमेज़न पर भी आप इसे खरीद सकते हैं :
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