Tuesday, 28 January 2014

भूख और भविष्य


लाल पीली बत्तियों में सत्य दिखाई नहीं देता.
बैठ कर दिल्ली से साहब भारत दिखाई नहीं देता. 

सीढियां चढ़ गये ऊपर बहोत अब नीचे देखने से, 
आदमी अच्छा ख़ासा, आदमी दिखाई नहीं देता. 

कोई मर जाए पड़ोस में पड़ोसी को खबर ही नहीं,
राब्ता पड़ोसी का पडोसी से दिखाई नहीं देता.

भूख,  पेट की आती है देश और धर्म से पहले,  
आदमी भूखा हो तो भविष्य दिखाई नहीं देता. 

लाभ अपना, सुख अपना, अपनी अपनी खोल में बंद, 
जिन्दा आदमी भी अब जिन्दा दिखाई नहीं देता.. 
... Neeraj Kumar Neer  #neeraj_kumar_neer 

चित्र गूगल से साभार 

16 comments:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

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    1. आभार आपका आदरणीय।

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  2. भारत का राजनैतिक सत्य सरल हो

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  3. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, आभार आपका।

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  4. भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने...

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  5. सत्य हो तो दिखाई दे
    सत्य होता ही नहीं है जो दिखाई देता
    अदभुत
    बहुत अच्छा लिखते हो !

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  6. बहुत ही सुन्दर ......

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  7. शुक्रिया हर्षवर्धन जी ..

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  8. यह ग़ज़ल नहीं...आईना है है सत्य दर्शन के लिए. बहुत अच्छा लगा.

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  9. बेहद सुंदर, सामयिक और सटीक गज़ल।

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  10. कटु सत्य को उजागर करती एक बेहतरीन गजल..

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  11. भूख, पेट की आती है देश और धर्म से पहले,
    आदमी भूखा हो तो भविष्य दिखाई नहीं देता. ...
    बहुत खूब ... हर शेर उम्दा ... हकीकत की बेबाक बयानी ... लाजवाब ...

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